चंदना मेरी नातिन , अब तो खैर बड़ी हो गई है ,बात तब की है जब छोटी थी . एक दिन क्लास में शिक्षिका ने देखा उसकी कापी में ऊपर की लाइनें तो ठीक लिखी हैं पर नीचे की लिखावट बिलकुल (मिरर इमेज)पलटी हुई जैसे दर्पण में पूरा चित्र पलटा हुआ वैसा ही .और चंदना बाएँ हाथ से लगातार वैसा ही उलटा-उलटा लिखे जा रही है.
'अरे ये क्या कर रही हो चंदना ,ये कैसा उलटा लिख रही हो ?
'मैम ,मेरे इस अँगूठे में चोट लग गई .पेन नहीं पकड़ पा रही हूँ ,तो बायें हाथ से लिख रही हूँ .'
और बायें हाथ से लगातार दूसरी तरफ़ पलटे हुये अक्षर बनते चले जा रहे हैं .
'तुम दोनों होथों से लिख लेती हो ?'
'हाँ . मम्मी इस हाथ से लिखने को मना करती हैं,पर अभी तो उसमें चोट है न .'
उसके दोनों हाथ एक से चलते हैं .अर्जुन का सव्यसाची नाम सुना था .दोनों हाथों से समान कौशल से शर-संधान में निपुण थे और आज देखती हूँ इस चंदना को .बाकी सारे काम तो दोनों हाथों से समान रूप के करते देखने की आदत है पर लिखना और वह भी उसी गति से ,बिना देखे मैं कल्पना भी नहीं कर पाती . पर वह करती है !जब छोटी थी बायें हाथ से लिखने पर मिरर इमेज बनती जाती थी पर अब बायें से भी सही रूप में लिखती है . एक हाथ थक जाय तो दूसरा शुरू.
है न कमाल !
**
सूचना - अब कुछ समय यात्राओँ पर ,अतः 10-12 दिन की छुट्टी
सूचना - अब कुछ समय यात्राओँ पर ,अतः 10-12 दिन की छुट्टी
