गुरुवार, 29 नवंबर 2012

दुखी हो लेना ही पर्याप्त नहीं है.


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आज मल्हार ब्लाग का आनन्द ले रही थी .वहाँ 8सितंबर 2012 की एक पोस्ट है -
अवन्तीपुर (कश्मीर).जिसमें 14वीं शती के एक  सुल्तान सिकंदर बुतशिकन द्वारा
क्रूरता की सभी हदें पार कर बड़े व्यापक रूप से धर्मांतरण हुए और साथ ही कत्ले आम भी.
 चुन चुन के सभी मंदिरों को धराशायी कर दिया गया . अवन्तिपुर का विष्णु मंदिर भी इसी कारण अन्य मंदिरों की तरह  वर्तमान अवस्था में है. यहअद्भुत एवं अद्वितीय मंदिर इतना मजबूत था कि उसे तोड़ने में एक साल लग गया था. अनंतनाग (इस्लामाबाद) से ८ किलोमीटर की दूरी पर ललितादित्य द्वारा ८ वीं सदी में निर्मित  मार्तंड सूर्य मंदिर के खँडहर हैं.
यह सब पढ़ कर और अपनी संस्कृति के इन पुरावशेषो को देख कर दुखी हो लेना ही पर्याप्त नहीं लगा. इस भू.पू.महादेश की समृद्ध संस्कृति,  ,(जिसमें धर्म ज्ञान-विज्ञान के अध्ययन एवं प्रयोगशालायें आदि ,तथा स्थापत्य महत्व के स्थल भी शामिल है ) के ऐसे बेजोड़ उदाहरण धार्मिक विद्वेष के कारण  किस-किस के द्वारा भग्न किये गये.इसका पूरा विवरण होना चाहिये .
एक सांस्कृतिक पर्यवेक्षण कर सारे विवरण एक जगह एकत्र किया जाएँ जो
उन कालों के सांस्कृतिक इतिहास का निरूपण करे .अपने प्राचीन(सांस्कृतिक) इतिहास को जानना भी ,हर भारतवासी का अधिकार है .
यह जानने की भी उत्सुकता है कि ,उस धर्म में क्या कोई विचारशील संतुलित व्यक्ति नहीं था जो इस धार्मिक उन्माद ,और आतंकवाद को सही मार्ग दिखाता .सब उसकी खूबियों के कसीदे पढ़ने वाले जमा थे, और वास्तव में क्या हो रहा है उस ओर से पीठ फेर लेना ही उनकी खासियत थी ?
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12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी बात सही है, नागरिकों को अपने इतिहास और सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहर के बारे मे जानने का अधिकार है| इनसे संबन्धित सभी तथ्य एकत्रित किए और सामने रखे जाने चाहिए।

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    1. sahi kaha aapne parantu , in dharohar ki raksha honi chahiye parantu dukh ki baat hai ki sevak hi udasin bane huye hai .

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  2. राहें चुन विध्वंस की, मस्त आसुरी शक्ति ।

    धर्म रूप अंकुश कहाँ, जो कर सके विरक्ति ।

    जो कर सके विरक्ति, चाटुकारों की टोली ।

    इर्द-गिर्द थे जमा, एक से सब हमजोली ।

    तोड़ केंद्र बेजोड़, दिया इतिहासिक आहें ।

    चलिए रखें समेट, आज तक पड़ी कराहें ।।

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  3. उस जमाने की बात तो छोड़ दीजिए आज भी वही लोग आतंक के पर्याय बने हुए है जिसका सबसे बड़ा कारण यही है कि उस समाज में बुद्धिजीवी लोगों की कोई नहीं सुनता है और धर्मान्ध लोगों की सबसे ज्यादा सुनी जाती है !!

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  4. धार्मिक जुनून ने इस देश को बहुत बर्बाद किया है। 15वीं शती तक दुनिया का सर्वश्रेष्‍ठ देश आज कहाँ आकर खड़ा है? हमानी नवीन पीढ़ी ही आज पश्चिम की ओर देख रही है, वह अपने विगत में नहीं देखती और उस विगत को वापस पाने का प्रयास नहीं करती बस पलायनवादी मानसिकता का शिकार है।

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  5. क्या कहूँ..भारत के लगभग सभी महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल और पुरातन मंदिर देख चुकी हूँ. नहीं बता सकती कि उनकी हालत देख कैसा महसूस होता है. उन क्रूर सुल्तानो ने गिन गिन कर ध्वस्त किये मंदिर और प्रतिमाएं. और जिन्हें ध्वस्त न कर सके उनके चेहरे पर वार करके खंडित कर दिया.क्योंकि वे जानते थे कि हिंदू खंडित प्रतिमाओं की आराधना नहीं करते :(.

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  6. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (1-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  7. धरोहरों की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए ,,,

    resent post : तड़प,,,

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  8. is lekh ko padh kar bangladesh me hue 1971 aur 1992 me hue katle-aam aur mandiro ki muslimo dwara ki gayi durdasha ki ghatnaaye yaad aa gayi....aur prashn uthta hai ki kya kashmeer ka bhi musalmaan yahi haal karenge....? kon jimmedar hai in sab ka....kya hamari goongi,behri, bhrashtachari sarkar....?

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  9. बढ़िया


    गंभीर मुद्दे उठाती है यह पोस्ट कृपया "कालों "के स्थान पर "काल खंडों "का इस्तेमाल करें कालों और गोरों का मामला अलग है .

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