गुरुवार, 8 अगस्त 2013

भानमती बोलती है ...


  भानमती बोलती है ,बिना कामा-फ़ुलस्टाप लगाए .उसकी चलती गाड़ी  मैं  रोक नहीं पाती ,लोक-जीवन के तमाम अनुभव वहाँ बैठे हैं, गठरी-मुठरी बिखेरे - झटका न  खा जाएँ कहीं!
 हमारी कामवाली रुकमा खूब सध गई थी ,अब ब्याह हुआ तो छुट्टी ली , तब से नहीं  आई.
 'अब वो ना आने की ,' भानमती का कहना है ,' सुखदेई को रख लो,एक तो कामचोर नहीं  .फिर हमारे  हमारे गाँव की है- जानी-बूझी .'
  'एक दिन एवजी पर काम किया था उसने. पता है क्या कह रही थी - हरामजादा  मरद ही ठीक होता तो काहे का दुख ...'
'दीदी जी ,गाली ही तो दी कोई  छोड़-छुट्टा तो नहीं किया.तीन-तीन बच्चन का और उस चार हाथ  के निखट्टू धींगड़ का पेट भरना  आसान है का? उस पर का बीत रही है सो हम जानित हैं .
 'हाड़-तोड़ काम करती है आदमी जो कमाता है खा-उड़ा देता है कभी कुछ दे दिया तो जइस एहसान कर दिया .
कल हम गए रहे उसके घरे , रोटियां सेंक रही थी .सो हम बाहर पड़ोसन से बात करत रहे .
तीनों बच्चे और आदमी  ,खाने बैठे .जब तीसरी बार उसने परसी ,दाल की बटलोई में चमचा खटखटाने लगा.उसने टेढ़ी कर ली और निकाल कर कटोरे में डाल दी ..रोटी सेंक-सेंक कर देती रही. सब खाय चुके  उठ गए ,किसी का ध्यान नहीं गया कितना बचा उसके लै.'
खाना खा कर आदमी बोला ,' ला पानी दे .'
उसने गिलास भर दिया, पानी पी कर डकार लेता निकल गया .
बटलोई  मे बची दाल उसी थाली में उँडेल ली उसने बचे आटे का टिक्कड़ सेंक कर आ बैठी . खा कर ऊपर से दो गिलास पानी पी कर उठ गई .
लौट कर आदमी ने पूछा,'सुन,कल पाँच रुपए दिये थे कुछ बचा?'
'कहाँ नमक-मिरच-तेल सबै खतम हो गया था .अभी दो रुपए उधार के बाकी रह गए .'
'तो उधार भी कर आई! हाथ समेट कर खरच किया कर री .'
'हर चीज में आग लगी है ,दुकानवाला देने को भी तैयार नहीं होता ,बड़ी चिरौरी के बाद तो सौदा देता है .अब वो क्या फालतू है जो जरा-जरा सा तोल के अपना  काम खोटी करे .उसके तो बड़े-बड़े गाहक हैं ...'
'बेसी बकबक मत कर ,बड़ी आई  गाहकवाली !कोई एहसान नहीं करता पैसा पकड़ता है तब देता है.. और तेरे गाहक नहीं का ,उनके घरै से खाय-पी के आती है, सुसरी. '
भानमती ने बताया था -
कौन खाना खिलाता है ?जरा बहुत बचा-बचाया मिल गया तो उससे कहूँ  पेट भरता है .और जानती हो दीदी जी उसकी छोटी तो अभी दूध-पीती  है .
और भी सुनो ,कोई अच्छी चीज कभी मिल जाय तो बच्चन के लै बाँध लाती है ,आदमी भी हिस्सा पा लेता है सोई ताने सुनाता है .'..
'काहे को ले जाती है फिर घर?'
'इहै हमने  कहा  तो कहे लगी  बच्चन का चेहरा सामने आय जावत है ,गले से कइस उतरे !'
'....हाँ तो उस दिन सुख देई चुप ना रही. बोल पड़ी ,खुद लै आया करो तौन पता लगे ..'
 आदमी गारी दे के चिल्लाय परा ,'जित्ती छूट मिलती है सिर पे चढ़ी आती है...' और बाही-तबाही बकन लगा.
  दिन भर की थकी देह ,ऊपर से अधपेट खाना. .ऊ भी चुप्पै न रही ,
बाहर सुने वालेन को लगा ऊ करकसा है. मरद  से जुबान लड़ाती है .ओहि पर का बीती किसउ ने जानी ?सुनन को कान सबन के ,बोलन को मुँह सबन के  .देखन को सबन की आँखी काहे बंद हुइ जाती हैं?'
सुन रही हूँ चुप, उत्तर नहीं मेरे पास.
 *
भानमती ने बताया ,उसने भी एक बार  टोका था,' ओहिका गरियाय के खुद काहे बदनाम होती हो?'
 ऊ  कहै लाग , दिमाक मार हौहियान लगत है जिउ में आवत है  आपन मूड़ पटक लेई.
गरियाय के चिल्लाय के हड़क निकारित हैं .हम पगलाय गइन तो ई बच्चन का का होई ? और कुछू बस में नहीं,तौन  गरियात हैं ....होय बदनामी तो होय  .पैदा करि के धरे हैं तिनकी बर्बादी तो न होय !'
कहो भानमती, मैं तुम से हारी हूँ !
सारे आदर्श लाद दो उन पर , औरते चुप रहेंगी हैं .सारे उपदेश उन्हीं के लिए .पत्नी हर कीमत पर सुशील और मदुभाषी हो .नहीं हो सके तो मर जाए ,नीतिकार कवि ने कहा है -'मरै करकसा नारि ,मरै वह खसम निखट्टू .'
पर निखट्टू खसम मनमाना रहेगा.
कह लो कवि, तुम्हारी भी दृष्टि उसके  बाह्य तक सीमित रह गई !
*
लेकिन  हारना मत सुखदेई ,तुम रहो !
  लड़ लेना ,गाली दे लेना .कर्कशा ही सही ,
तुम बिन बच्चों का यहाँ कोई नहीं,तब उनकी बर्बादी कोई नहीं रोक पाएगा .
और सुनो ,पगलाना भी मत तुम ,कोई देखने-सुननेवाला नहीं होगा !
और सुखदेई ,तब ,तुम्हारे नारी-तन की दुर्गत,और बेसहारा बच्चों का हाल सोच कर ही जी काँप जाता है .
इसलिए सुनो, जी का गुबार निकाल लेना !
 कहने दो कर्कशा, पर  होश मत खोना .औरत का मरना उन लोगों के लिए सिर्फ़ एक तमाशा है पर सुखदेई ,तुम जीवित रहना !
 **

7 टिप्‍पणियां:

  1. स्त्रियों की जिजीविषा ही उन्हें जिन्दा रखती है , बनी रहे !

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  2. गहन मार्मिक और सशक्त संदेश देती हुई लघुकथा ....सुखदेई तुम जीवित रहना ....!

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  3. स्त्री तो चाह कर भी नहीं मर सकती .... अपनी संतति को पालना जो है ... प्रेरक कथा ... भानमती के अनुभव बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करते हैं ।

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  4. नारी जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी...

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  5. प्रेरक और ज्ञानवर्धक कथा..

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