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रविवार, 20 फ़रवरी 2011

भानमती की बात -1.

भानमती के कुनबे' (एक ब्लाग था मेरा)पर पोस्ट देना बंद करने के बाद से वह महिला विद्रोह पर उतारू हो गई है.
बहुत दिनों से उसे मना-मना कर रोके हूँ अब वह बिलकुल नहीं सुन रही.पूरे कुनबे के साथ सिर पर सवार है .कहती है -लोकतंत्र के युग में classes के हित के लिए masses को खारिज कर देना अन्याय है.
अब चुप नहीं रहेगी भानमती . मजबूरी में इस ब्लाग् पर बीच-बीच में उसे बोलने का मौका देना पड़ेगा .
लीजिए ,शुरू हो गई  वह -
कहीं धर्मपत्नी शब्द का प्रयोग सुनती हूँ तो ,मन का कौतूहल जाग उठता है .सोचती हूं धर्मपत्नी हैं यह, सचमुच की पत्नी नहीं होंगी, तभी ! यही देखा  है कि वास्तव में जो स्थिति नहीं होती उसे औचित्यपूर्ण ठहराने के लिए 'धर्म' को साथ लगा देते हैं .जैसे धर्म-भाई /बहिन .वास्तविक जीवन में भाई/बहिन का नाता नहीं है लेकिन मन से मान लिया है .धर्म का नाता है .मतलब यह कि जो असली भाई /बहिन नहीं है वह धर्मभाई/बहिन बन सकता है .नहीं तो संबंध सहज-स्वाभाविक स्वयंसिद्ध हो तो  ,धर्म को बीच में लाने की ज़रूरत ही नहीं .अपनी बहिन से 'धर्म-बहिन' कह कर देखना ज़रा ,डंडा लेकर दौड़ा देगी .
 और माता-पिता से धर्म का वास्ता दे कर संबंध जोड़ सकते हैं ?-कहेंगे  धर्म-पिता या धर्म-माता ?
सावधान, धक्का दे कर  घर से निकाल देंगे १

मेरी समझ में नहीं आता कि पत्नी के साथ तो धर्म जोड़ दिया ,पति के साथ नहीं. .पत्नी तो पत्नी ,विवाहिता या जिस भी विधि से यह संबंध जुड़ा हो. हाँ,धर्म-पति अब तक नहीं सुना जब कि धर्मपत्नी शुरू से सुनते आए हैं.पति केवल पति होते होंगे ,उनके लिए धर्म-अधर्म का कोई विचार नहीं होता .
धर्म पति सुना नहीं ,पर उदाहरण देखे हैं. -विवाहित पति और व्यवहार या आवश्यकता के लिये जिससे जुड़ गई हो-उसे धर्मपति होना चाहिए .क्यों कि धर्म के  अनुसार यह बातविहित है .जैसे कुन्ती के लिए लिए धर्म,इन्द्र,वायु आदि धर्म पति और पांडु ,वैधानिक पति .- संतानें उन्हीं की कहलाएँगी ( सब पाँडव कहाए ) .

धर्म पति सामयिक होता है ,केवल काम चलाऊ, नाम पति का ही रहेगा .पाँडवों में तो पाँचो द्रौपदी के पति थे ,फ़ुलटाइम तो नहीं पर विधिपूर्वक विवाहित ,सर्व मान्य ! जहाँ तक पत्नी का सवाल है ,वह चाहे जितनी कर ले आदमी ,पर वहाँ कोई आपसी भेद नहीं होता कि ये तो धर्मपत्नी है, तुम केवल पत्नी. उपपत्नी - उपपति तो ठीक हैं ,वहाँ दर्जा प्रमुख और गौण होने का है पर पत्नी और धर्म पत्नी ! यह रहस्य मैं नहीं समझ पाई आज तक

वैसे नीति या विधि-विधान के हिसाब से जैसा और संबंधों में देखा गया है- जो असली पत्नी नहीं है वही धर्मपत्नी कही जा सकती है !

अगर कोई स्पष्टीकरण दे सके तो संशय दूर हो !

- भानमती