बुधवार, 2 दिसंबर 2015

स्मॉग से ईंट !

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स्मॉग (धुँआसा शब्द  हो सकता है बिलकुल सही न हो) से  ईंट का निर्माण   -
आश्चर्य मत कीजिये .चीन के एक कलाकार ने वातावरण में छाये प्रदूषण को समेट कर उसे ठोस रूप में सामने ला दिया.हवा में समाये कटु-तिक्त कणों को समेट कर उनकी घनाकार ईंट बना कर प्रत्यक्ष कर दिया. कलाकार का नाम जिंगोऊ ज़ियाँग (मंडारिन भाषा में) पर वह अपने को Brother Nut कहलाना अधिक पसंद करता है.
 प्रारंभ में वह इससे बचने को सुरक्षा का आवरण ओढ़ता रहा फिर उसे लगा कि इस प्रकार के स्मॉग से छुटकारा संभव नहीं .उस ने विचार किया यद्यपि वह प्रदूषण के PM 2.5 (Particular Matter) के या उसके दुष्प्रभावों को विशेषज्ञ नहीं फिर भी कुछ तो करना चाहिये . और भाई नट ने रिचार्जेबिल बैटरीज़वाला बहुत शक्ततिशाली वैक्यूम क्लीनर खरीदा और उसे लेकर निकल पड़े.बीज़िंग के विशेष स्थानों पर सौ दिनों तक वेग से चला कर वातावरण का दूषण एकत्र करते रहे .जो भूरा जंक इकट्ठा हुआ उसमें  लाल मिट्टी मिला कर ईंट के ठोस रूप में तैय्यार कर लिया .
सड़कों पर क्लीनर लगा कर जब वे अपने कार्य में लगे थे तो कुछ लोग उन्हें हाइटेक क्लीनर समझकर कह उठे - वाह बीज़िंग में यह काम बढ़िया हो रहा है.
और कुछ ने तो उन्हें वैक्यूम क्लीनर विक्रेता समझ लिया था. पर   वे लगे रहे अपने काम में और उड़नशील कणों की  ठोस रूप देकर ही दम लिया .
धुन के पक्के निकले  Brother Nut ! 
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13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (04-12-2015) को "कौन से शब्द चाहियें" (चर्चा अंक- 2180) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. ये तो कमाल है .... आज कल दिल्ली भी स्मॉग से परेशान है .... ऐसे प्रयास हों तो कुछ हद तक प्रदुषण से बचा जा सकता है .

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  3. ऐसी चिजों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होना चाहिए और ऐसी प्रतिभाओं को उचित प्रोत्साहन मिलना चाहिए। सुंदर प्रस्तुति...

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  4. वाह ! brother nut तो बड़े जुझारू निकले..धुआं भी तो कार्बन कणों का समूह ही है..दिल्ली में कोई सुन रहा है ..

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  5. शकुन्तला बहादुर4 दिसंबर 2015 को 1:04 pm

    प्रतिभा जी, वाह! वाह !!आपकी इस सूचना ने तो आश्चर्यचकित कर दिया । ब्रदर नट का दृढ़-संकल्प और प्रतिबद्धता प्रशंसनीय है । भारत में दिल्ली प्रशासन को इस का अनुकरण करना चाहिये । आपका आभार !!

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  6. :) woww! Rochak post Pratibha Jiiii !!!!

    kam se kam China jagruk hai aur log bhi.

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  7. एकदम नई जानकारी देकर आपने हम सभी का ज्ञान बढ़ाया। आभार आपका।

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  8. नया प्रयोग, अच्छा कार्य ।

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  9. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामना

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