लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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बुधवार, 24 फ़रवरी 2021
राग - विराग : 6.
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6. .नन्ददास तुलसी से काशी में प्रायः ही भेंट करते रहते थे. ' कुछ दिन टिक कर एक स्थान पर रहो दद्दू , आराम रहेगा और लिखने-पढ़ने मे...
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सोमवार, 22 फ़रवरी 2021
छोटे मियाँ सुभानअल्लाह!
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छोटे मियाँ सुभान अल्लाह. बचपन में मेरा बेटा कुछ ज़्यादा ही अक्लमन्द था..बाल की खाल निकाल देता था. एक बार उसकी एक चप्पल कहीं इधर-उधर हो गई...
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मंगलवार, 9 फ़रवरी 2021
राग-विराग -5.
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* हिमाचल-पुत्री गंगा, शिखरों से उतर उमँगती हुई सागर से मिलने चल पड़ती है. लंबी यात्रा के बीच मायके की याद आती है तो मानस लहरियाँ उस ओर घूम ...
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शनिवार, 30 जनवरी 2021
चित्रगुप्त जी की बेरुख़ी -
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* एक विशेष घटना जिसके फल स्वरूप सृष्टि में अव्यवस्था फैल गई थी ,कायस्थ लोग दीपावली की भाई दूज पर चित्रगुप्त जी की पूजा के क्रम में लेखनी...
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शुक्रवार, 8 जनवरी 2021
राग-विराग - 4.
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['मोइ दीनों संदेस पिय, अनुज नंद के हाथ। रतन समुझि जनि पृथक मोहि, जो सुमिरत रघुनाथ।।' - रत्नावली] * ...
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बुधवार, 9 दिसंबर 2020
राग-विराग - 3.
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विराग जिस राह को उतावली में पार कर तुलसी रत्नावली से मिलने उसके पीहर जा पहुँचे थे, उसी पर ग्लानि-ग्रस्त , यंत्र-चलित से पग बढ़ाते लौटे ज...
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बुधवार, 18 नवंबर 2020
सफ़ाई
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हमारी नातिन बड़ी सफ़ाई पसन्द है . एक बार की बात है मेरा कंघा नहीं मिल रहा था. वह बोली,'नानी मेरा ले लीजिये .' 'ढूँढ रही हूँ....
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