लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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मंगलवार, 12 मई 2020
का चुपि साध रहेउ बलवाना...'
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* राम कथा के अंतर्गत सुन्दरकाण्ड, परम सात्विक वृत्तिधारी पवनपुत्र हनुमान के बल,बुद्धि एवं कौशल की कीर्ति-कथा है, उन्नतचेता भक्त की निष्ठ...
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सोमवार, 3 फ़रवरी 2020
कुछ पुराने पन्ने -
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* विवाह के बाद, प्रारंभिक वर्षों में दीवाली हर साल अम्माँ-बाबूजी के साथ (ससुराल में)होती थी. सबको बड़ी प्रतीक्षा रहती थी. हमारे यहाँ दीव...
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बुधवार, 11 दिसंबर 2019
जब अक्ल घास चरने निकल जाय...
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* रात के दस बजकर अट्ठावन मिनट हो चुके हैं ,मुझे उत्सुकता है यह जानने की, कि इस घड़ी में अंकों का रूप एकदम से कैसे बदल जाता है . हुआ यह क...
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बुधवार, 13 नवंबर 2019
मैं, अश्वत्थामा बोल रहा हूँ - 3.
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* द्वापर युग बीत गया. मानव के मान-मूल्यों के क्षरण की गाथा रच, मानव चरित्र का वह अद्भुत आख्यान,अपने अध्याय पूरे कर, छोड़ गया अंतर्चेतना के...
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बुधवार, 30 अक्टूबर 2019
अपनी अपनी पैकिंग -
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* बड़ा लोभी है मन ,कहीं सुन्दरता देखी नहीं कि अपने भीतर संजो लेने को उतावला हो उठता है. और तो और प्लास्टिक के सजीले पारदर्शी लिफ़ाफ़े जिस...
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रविवार, 20 अक्टूबर 2019
अक्ल की बाढ़
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* यह अक्ल नाम की बला जो इन्सान के साथ जुड़ी है बड़ी फ़ालतू चीज़ है. बाबा आदम के उन जन्नतवाले दिनों में इसका नामोनिशान नहीं था. मुसम्मात ह...
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मंगलवार, 27 अगस्त 2019
आस्थावान या आस्थाहीन?
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* मुझे याद है उन दिनों, की जब मोहल्ले के मंदिरों में सुबह-शाम झाँझ-मझीरे बजाकर आरती होती थी ,आस-पास के बच्चे बड़े चाव से इकट्ठे हो कर मँझ...
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