लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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सोमवार, 20 मार्च 2017
एक बार फिर ...
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* हे अपार करुणामय अमिताभ बुद्ध ,क्षमा करना -मैं एक मंद-मति नारी हूँ, जो नर के समान सहज मानव के रूप में तुम्हें भी स्वीकार्य नहीं थ...
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रविवार, 29 जनवरी 2017
लिये लुकाठी हाथ !
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* बहुत समय बाद कबीर भारत आये तो देश में अंगरेजी की शान देख कर चकित हो गये . गुण-गान सुनते रहे .... कैसा साहित्य -कैसी अधिकारमयी, ...
11 टिप्पणियां:
गुरुवार, 12 जनवरी 2017
मन की लगाम -
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* शाम को जब भ्रमण पर निकलती हूँ तो बहुत लोगआते-जाते मिल जाते हैं. अधिकतर फ़ोन कान से सटाये बोलते-सुनते चलते जाते हैं ,अपने आप में मग्न ....
5 टिप्पणियां:
शनिवार, 12 नवंबर 2016
पर मैं और क्या करती ..!
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* यहाँ अमेरिका में लोग जिस तरह अंग्रेज़ी बोलते हैं,कभी-कभी सिर के ऊपर से निकल जाती है. रोज़ शाम को टहलने निकलती हूँ.अड़ोस-पड़ोस में क...
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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016
और मैं चुप !
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* 'नानी ,काँ पे हो...?' 'कौन है ?'अनायास मेरे मुँह से निकला, महरी बोली,'आपकी नतनी ,और कौन ?' वैसे मैं जानती ह...
17 टिप्पणियां:
शनिवार, 1 अक्टूबर 2016
'यो मां जयति संग्रामे
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नवरात्र ! कानों में गूँजने लगता है - 'यो मां जयति संग्रामे, यो मे दर्प व्यपोहति । यो मे प्रति-बलो लोके, स मे भर्त्ता भविष्यति ।।...
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गुरुवार, 29 सितंबर 2016
अललटप्पू.
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* अललटप्पू - जिसने यह शब्द नहीं सुना होगा,पूछेगा - इसका मतलब क्या ? मतलब है अटकलपच्चू . अब यह भी समझ में नहीं आया तो समझाना पड़ेगा. सुन...
11 टिप्पणियां:
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