लालित्यम्

ललित लेखन -गद्य .

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सोमवार, 21 मार्च 2011

बड़ा मज़ा आया !

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* दो छोट-छोटे मोज़े ,ऊपर से रोल किए हुए जैसे उतारे वैसे ही उछाल दिए .एक इधर ,एक उधर . सिमटे पड़े हैं दोनों - एड़ी और पंजे दोनों के काफ़ी श...
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प्रतिभा सक्सेना
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