लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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सोमवार, 22 सितंबर 2014
कथांश - 20 .
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' एक क्षण का भी स्वतंत्र अस्तित्व होता है ,आज समझ पाया हूँ उसका महत्व, उसकी सार्थकता . कुछ बीते हुए पलों की तृप्ति मन को छाँह दे गयी...
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