लालित्यम्

ललित लेखन -गद्य .

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गुरुवार, 31 मार्च 2011

भानमती की बात - आग और फूस.

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* बड़ों की कही हुई बातें कभी-कभी सोचती ही रह जाती हूँ .कुछ सार तो था ही ,अब कोई चाहे जितना दकियानूसी कह ले .व्यावहारिक दृष्टि से देखा जाय ...
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प्रतिभा सक्सेना
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