लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017
श्रीकृष्ण चरित्र का यथार्थ : एक दृष्टि .
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पुरोवाक् - भारतीय जन-मानस में श्रीकृष्ण की छवि, ईश्वर का पूर्णावतार होने के साथ परम रसिक नायक एवं प्रेम तथा करुणा के आगार के रूप में विद्यमा...
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सोमवार, 2 अक्टूबर 2017
कृष्ण सखी - एक प्रतिक्रया
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* डॉ. प्रतिभा सक्सेना एक ऐसा नाम है जिनके नाम से जुड़े हैं उत्कृष्ट खण्ड-काव्य, लोक गीत, हास्य-व्यंग्य, निबंध, नाटक और जुड़ी हैं कहानियाँ, क...
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मंगलवार, 26 सितंबर 2017
श्री सलिल वर्मा द्वारा कृष्ण-सखी - एक प्रतिक्रिया ,पर मैं जो कहना चाहती हूँ -
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श्री सलिल वर्मा द्वारा कृष्ण-सखी - एक प्रतिक्रिया ,पर मैं जो कहना चाहती हूँ - कृष्ण -सखी का यह मूल्यांकन ऐसा लगा जैसे पूरी तरह रचना के ग...
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मंगलवार, 15 अगस्त 2017
जहँ-जँह चरण पड़ें ....
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* इंसानी कारस्तानियों से तो अब सारी दुनिया पनाह माँगने लगी है .एक छोटा सा उदाहरण अभी हाल ही में सामने आया ह...
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शनिवार, 29 जुलाई 2017
हम भी हैं पाप के भागी -
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* रात्रि आधी से अधिक बीत चुकी थी ,हमलोगों को लौटने में बहुत देर हो गई थी ,उस कालोनी में अँधेरा पड़ा था.कारण बताया गया कि रात्रि-चर और वन्य...
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बुधवार, 19 जुलाई 2017
आगे-आगे देखिये होता है क्या ...
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* जन्म से लेकर मृत्यु तक हम वस्त्रों में ही लिपटे रहते हैं. वस्त्र-विन्यास का यह तीसरा युग है . पहला युग - प्राकृतिक उपादानों से निर्मित ...
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शुक्रवार, 7 जुलाई 2017
आवहि बहुरि वसन्त ॠतु -
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* बड़ी तेज़ गति से चलते चले जाना - वांछित तोष तो मिलता नहीं ,ऊपर से मनः ऊर्जा का क्षय ! तब लगता है क्यों न अपनी मौज में रमते हुये पग...
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