लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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मंगलवार, 30 दिसंबर 2014
नव संवत्सर पर ..
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नव-संवत्सर पर हम सब की शुभ-कामनाएँ, विगत विक्षोभों पर पारस्परिक विश्वास और शान्ति के वितान तानती, उन्मुक्त सद्भावना के अबाध ...
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बुधवार, 17 दिसंबर 2014
कथांश - 28.
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* दिन भर भागम-भाग मचाती हवाएँ कुछ शान्त हुई हैं.पेड़ों की लंबी परछाइयाँ खिड़की पर धीरे-धीरे हिल रही हैं .व्यस्त दिन के बाद अपार्टमेंट का ...
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गुरुवार, 11 दिसंबर 2014
'हेलो ,हेलो,' - क्यों करते हैं ?
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* 'हेलो ,हेलो,' क्यों करते हैं ? टेलिफ़ोन के आविष्कारक एलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल की मार्गरेट नाम धारिणी एक मित्र थीं जिनका पूरा नाम ...
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बुधवार, 3 दिसंबर 2014
कथांश - 27 .
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सबकुछ ठीक करने का जी-जान से प्रयत्न करता हूँ ,और एक झोंक में सब पर पानी फिर जाता है .समझ में नहीं आता कहाँ कसर रह जाती है . अंतर की शून्...
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मंगलवार, 25 नवंबर 2014
कथांश - 26 .
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* वसु माँ के पास रुक गई थी. तनय का कहना था ,भइया अधिक छुट्टियाँ नहीं ले सकते .तुम्हीं रुक जाओ .माँ कुछ ठीक हो जायँ तो मैं ले जाऊँगा .मैंन...
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मंगलवार, 18 नवंबर 2014
हे कृष्ण , यहाँ मत आना तुम !
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* ओ कृष्ण ,तुम मत आना ! यहाँ मत आना तुम !! गला फाड़-फाड़ कर टेर रहे हैं जो पाखंडी ,अपन- स्वार्थी ,उनके शब्दों पर मत जाना. ये लोग अप...
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गुरुवार, 6 नवंबर 2014
कथांश - 25.
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* सुबह आँगन से आवाज़ दे कर मुझे चाय का कप पकड़ा दिया था सुमति ने . कोई विशेष बात-चीत नहीं हुई . दोपहर में मुझे थाली परोस कर दे गई . एक ...
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