लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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शुक्रवार, 30 अगस्त 2013
सागर-संगम - 4.
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लोकमन - काल की धारा बहती रही .जीवन का क्रम आगे बढ़ता रहा. सूत्र - आर्यों ने जो वर्ण व्यवस्था समाज को सुचारु रूप से चलाने के लिये बनाई थ...
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शुक्रवार, 23 अगस्त 2013
सागर-संगम -3.
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* दृष्य - 3 सूत्र - कितनी उन्नत सभ्यता ,कैसा आनन्दमय जीवन और अब केवल खँडहर बचे . लोक -कोई बड़ी भौतिक आपदा .इसके विनाश का कारण बन ग...
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मंगलवार, 20 अगस्त 2013
सागर-संगम - 2.
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* (पूर्व-दृष्य की निरंतरता . ) लोकमन - बहुत प्रसन्न हो रही हो कि हम देवों की संतान हैं पर उनके पराभव और नाश की गाथा से भी कुछ शिक्षा ले ल...
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बुधवार, 14 अगस्त 2013
सागर-संगम -1 .
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[ भारतीय संस्कृति की भावात्मक एकता पर आधारित नाट्यरूपक.] (एक मंचन के लिए इस भाव-नाटिका को काफ़ी पहले तैयार किया था , मंचन सफल रहा पर ...
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मंगलवार, 13 अगस्त 2013
सबसे बड़ा दोष.
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हेमा ने सुसाइड कर लिया ! भार्गवी की बात सुन कर सन्न गई हूँ . अंतरात्मा चीख उठती है ,' नहीं, नहीं, नहीं !' अभी उसकी उम्र ही क्या ...
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गुरुवार, 8 अगस्त 2013
भानमती बोलती है ...
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भानमती बोलती है ,बिना कामा-फ़ुलस्टाप लगाए .उसकी चलती गाड़ी मैं रोक नहीं पाती ,लोक-जीवन के तमाम अनुभव वहाँ बैठे हैं, गठरी-मुठरी बिखेरे ...
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गुरुवार, 25 जुलाई 2013
हमें अपने भारतीय होने पर गर्व है !
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* हमें अपने भारतीय होने पर गर्व है ! लेकिन काहे पर ? सब को पता तो चलें हमारी ख़ूबियाँ जिन्हें हम सिर उठा कर गिना दें , अपने भारतीयत...
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