लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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बुधवार, 1 मई 2013
हमारा सेंसर-बोर्ड.
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* भारत में सिनेमा और टीवी सीरियलों को प्रदर्शित होने से पहले सेंसर से गुज़रना पड़ता है .पर ऐसा लगता है कि कोई सुविचारित अनुशासन- व्यवस्था...
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शनिवार, 27 अप्रैल 2013
हिन्दी की जान !
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* सुन रही हूँ पूर्ण-विराम की खड़ी पाई या डंडा हिन्दी की जान है,उसके बिना उस की मौत हो जाएगी.बचपन में कहानियाँ सुनी थीं परियों की ,राक्षसो...
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रविवार, 14 अप्रैल 2013
एक मोहक लोक-विधा की जीवन-यात्रा : नचारी .
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* [कुछ प्रतिक्रियायें पढ़ कर लग रहा है कि 'नचारी ' का स्वरूप स्पष्ट हो सके इसके लिए कोई उदाहरण (हिन्दी भाषा में)सामने हो तो अधिक ...
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गुरुवार, 4 अप्रैल 2013
भानमती समझ गई...
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संत कबीर ने कहा था- 'देस-विदेसे मैं फिरा गाँव-गाँव की खोर , ऐसा हियरा ना मिला लेवे फटक -पछोर.' भानमती ने सुना, तुरंत बोल उठी,...
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गुरुवार, 21 मार्च 2013
ज़िन्दगी ज़िन्दादिली का नाम है!
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* उस दिन रागिनी जी से भेंट हुई बेटी के पास आई हुई थीं.पति का देहान्त हुए दस साल हो गये थे ..बच्चे अपनी नौकरियों पर पुत्री का विवाह सबसे न...
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बुधवार, 20 मार्च 2013
एक थी गौरैया .
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* एक छोटी-सी गौरैया थी.उसे एक द्यूल मिला - (पता है द्यूल क्या होता है? चने की दाल का एक दाना.) वह बड़ी खुश हुई .और उसे खाने के लिये चक्...
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बुधवार, 13 मार्च 2013
यादों के चिराग़ -
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* आजकल बड़ी पुरानी बातें ,लगातार याद आए जा रही हैं. मित्रों ने भी चढ़ा दिया ,'और बताओ,' कह कर . तब की पत्रकारिता की क्या कहूँ -अब...
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