लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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शनिवार, 26 जनवरी 2013
इतना तो विहित है -
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* अब के लोगों के गले से ज़रा कम ही उतरेगी .बात तब की है जब हमारे देश में स्त्रियाँ पति का नाम नहीं लेती थीं, मेरी तो ऐसी आदत पड़ी है कि...
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गुरुवार, 24 जनवरी 2013
हिमगिरि के ननिहाल में (उत्तरार्ध).
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* लीजिये,आ गया ब्रह्मअरण्य क्षेत्र ! पाँच नदियों का संगम -कृष्णा ,कोयना ,वेण्णा ,सावित्री और गायत्री. कृष्णा नदी का क्षेत्र बहुत विस्त...
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बुधवार, 9 जनवरी 2013
रट के आई हैं ?
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मौसम बदल रहा था ।ऐसे दिनों में प्रायः ही ज़ुकाम की शिकायत हो जाती है । जब क्लास में खड़े होकर बोलना पड़ता है तो गले में एकदम सुरसुरी और...
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शनिवार, 5 जनवरी 2013
हिमगिरि के ननिहाल में -
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* देश के दक्षिणी भागों की यात्रा का स्वभाव और प्रभाव ही कुछ और है .उत्तर के गंगा-यमुनी समतलों को पीछे छोड़ती विंध्य और सतपुड़ा से आगे ...
10 टिप्पणियां:
बुधवार, 2 जनवरी 2013
ब्लागर मित्रों से निवेदन ,
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ब्लागर मित्रों , चेत जाइये !पत्रों-पत्रिकाओं में बिना रचयिता की अनुमति के जो रचनाएं ब्लागों से ले कर छाप ली जाती हैं उससे आप उपकृत नहीं ...
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सोमवार, 31 दिसंबर 2012
हम चाहते हैं ..
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"...I have tried to keep the memory alive.I have tried to fight those who would forget because if we forget we are guilty, we are a...
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शनिवार, 22 दिसंबर 2012
एक क़िस्सा
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* दो मिले-मिले घर थे ,इधर ज़रा मुँह खोल कर बोलो तो उधर सुनाई दे . एक दूसरे के घर से आनेवाली आवाज़ों में रुचि लेने लगे दोनों परिवार. इध...
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