लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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मंगलवार, 24 अप्रैल 2012
कृष्ण-सखी - 35.& 36.
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35 * सुभद्रा का पुत्र ,कृष्ण का भागिनेय - अभिमन्यु ! रह-रह कर पार्थ का हृदय तड़प उठता है, उन सात महारथियों ने कैसे घेर कर मारा होगा अ...
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शनिवार, 14 अप्रैल 2012
कृष्ण-सखी - 33 & 34 .
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33 * साक्षात् काल- रूप धरे हैं भीष्म ! तुले हुये ,जैसे ललकार रहे हों पार्थ को .कब तक संयत रहोगे ? आज मुझसे निपटना ही पड़ेगा .पांचाल और ...
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सोमवार, 9 अप्रैल 2012
सावधान ,वे सड़कों पर घूम रहे हैं
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* फ़िल्में और उनके गीत ,हमारे शयन-कक्षों और ड्राइँग रूम्स का हिस्सा बन चुके हैं .मुंबइया हिन्दी हमारी भाषा में छौंक लगाने लगी है (बिंदा...
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बुधवार, 4 अप्रैल 2012
कृष्ण-सखी .31 & 32 .
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31. व्यग्रता से पांचाली के पीछे बारादरी में निकल आये थे पितामह. जनार्दन को देख विस्मयाभिभूत से कुछ पल खड़े रह गये . आगे के घटन...
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शनिवार, 31 मार्च 2012
नहीं ,नहीं जायेंगे आप !
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* (यह पोस्ट, इसी ब्लाग की (वर्णों पर आधारित) 'देवनगर वार्ता' दिनांक 4.10.10, के अगले क्रम के रूप में प्रस्तुत है .कृपया उसी संदर्...
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शनिवार, 24 मार्च 2012
कृष्ण-सखी - 29 .& 30.
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**29. नहीं टल सका युद्ध ! पाँच ग्राम भी देने को तैयार नहीं हुये वे .'युद्ध अवश्यंभावी है ' -आभास था. पर अब स्थिति सामने है. हो ग...
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शुक्रवार, 9 मार्च 2012
कृष्ण-सखी - 27 & 28.
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27. श्री पंचमी - वसंतागम का संदेश ! माघ बीता जा रहा है सूर्य उत्तरायण हो गये. दिवस का विस्तार देख रात्रियाँ सिमटने लगीं. दिवाओं में नई ओ...
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