लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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बुधवार, 14 दिसंबर 2011
रट के आई हैं !
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मौसम बदल रहा था ।ऐसे दिनों में प्रायः ही ज़ुकाम की शिकायत हो जाती है । जब क्लास में खड़े होकर बोलना पड़ता है तो गले में एकदम सुरसुरी औ...
मंगलवार, 13 दिसंबर 2011
कृष्ण-सखी .- 17 & 18 .
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* 17. कृष्ण का चक्कर इस बार अपेक्षाकृत विलंब से लगा था. चिंता की एक लकीर भाइयों की मुद्रा पर स्पष्ट झलक रही थी. 'भीम भैया , अर्ज...
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शुक्रवार, 25 नवंबर 2011
कृष्ण-सखी - 15 & 16.
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15. दोनों मित्रों में कैसा विचित्र -सा साम्य ! लगता है , एक ही तत्व के दो रूप अपने-अपने परिवेश में आमने-सामने आ गये हों . फिर भी संबं...
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बुधवार, 23 नवंबर 2011
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ये बच्चे भी न ! * तब मेरी पुत्री का परिवार बरौनी - बिहार में था. उन दिनों लीचियों की बहार थी . मेरी नातिन ,चन्दना , होगी 4-5 वर्ष क...
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सोमवार, 21 नवंबर 2011
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ये धरती - * (बाल-दिवस पर मन में आया कि हमें बच्चों के लिये भी कुछ लिखना चाहिये .कोशिश की है एक कहानी लिखने की -जैसी भी बन पड़ी प्रस्तुत ...
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बुधवार, 16 नवंबर 2011
काल-मृत्यु .
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* अभी तक सुना करती था कि अमुक , उपायों से अमुक रसायनो से या अमुक (अष्टांग योग आदि की) साधना से -आयु बढ़ जाती है .मुझे आश्चर्य होता था ...
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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011
कृष्ण-सखी 13. & 14.
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13. कृष्ण पक्ष की अष्टमी .वातायन से आती चाँदनी अपनी श्यामता एवं उजास भरी कूचियाँ फेर स्वप्नलोक का निर्माण कर रही है . समय का अविराम चक...
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