लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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शुक्रवार, 30 सितंबर 2011
एक थी तरु - समापन सत्र (36 & 37.)
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36. आज फिर कनाडा से चिट्ठी आई है जीजा की चिट्ठी पिछले महीने भी तीनों के पास आई थी कि गौतम की पत्नी ,शन्नो या तरु में से कोई कुछ महींनो...
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मंगलवार, 20 सितंबर 2011
एक थी तरु - 34. & 35.
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34. कभा-कभी जब कुछ करने को नहीं होता मन जाने किन पुरानी गलियों में भटक जाता है .एक से एक बेमेल स्मृतियाँ ,कोई तुक नहीं जिनकी आज के जीवन स...
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बुधवार, 7 सितंबर 2011
एक थी तरु - 32. & 33.
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32 विपिन के माता-पिता आ गये हैं .उसे साथ लेकर जायेंगे .स्थान परिवर्तन से उसके मानसिक संतुलन पर अनुकूल प्रभाव होने की संभावना है .डॉक्टरो...
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बुधवार, 31 अगस्त 2011
पुकार .
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* लगभग दो वर्ष बाद भारत लौट रही हूँ ,सानफ़्रान्सिस्को एयरपोर्ट से दो दिन के उबाऊ सफ़र के बाद नई दिल्ली आ कर देश की धरती का परस मिला . पर...
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बुधवार, 24 अगस्त 2011
एक थी तरु - 30. & 31.
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30. तरल का मन विवाह के कार्यों से बार-बार उखड़ जाता है . एक डर सा बैठ गया मन में . बार-बार विपिन का ध्यान आता है . एक हफ़्ता हो गया ...
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मंगलवार, 16 अगस्त 2011
'ज' के साथ 'जी'.
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* बात उन दिनों की है जब हँसी आती थी तो आये चली जाती रुकने का नाम नहीं . और हर बात पर,चाहे तुक की हो चाहे बेतुकी, एक दूसरे की खिंचाई करने...
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गुरुवार, 11 अगस्त 2011
एक थी तरु - 28 & 29.
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28 . अन्दर घुसते ही तरु को महक लगी जैसे कुछ जल रहा हो .कुछ देर में महक और तेज़ हो गई . "चंचल , कुछ जल रहा है क्या?" ...
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