लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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गुरुवार, 23 दिसंबर 2010
एक जानकारी
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"...न ही इस बात की कोई जानकारी है कि लड़कपन के उस दौर के बाद फिर कभी राधा से उनकी मुलाकात भी हुई या नहीं।" चंद्रभूषण जी (पहलू)...
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शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010
New-दो संस्कृतियों के बीच काश, पथ बनता..
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शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010
द्वाभाओँ के पार
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* अभी मेरे कमरे को डूबते सूरज की किरणें आलोकित किये हैं .सांध्य-भ्रमण के लिए तैयार होकर नीचे उतरी हूँ .. ' देखो सूरज डूब गया, शाम हो...
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मंगलवार, 7 दिसंबर 2010
ट्राई कर देखिये ...
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बाज़ार घूमते हमने एक दुकान पर नाम देखा - "रणजीत चप्पल्स' . बड़ा ताज्जुब हुआ !चप्पल का रण जीतने से क्या संबंध ? कुछ ग़लत पढ़ गये...
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शनिवार, 27 नवंबर 2010
वाह रे लड़के !
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आगे बढ़ने के क्रम में जीवन-धारा क्या मज़ेदार वाक़ये पीछे छोड़ती चलती है !ऐसे छींटे उछालती है कि यत्न से जोड़ी हुई कथाएं उसके आगे फीकी पड़ जा...
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बुधवार, 17 नवंबर 2010
वाह टमाटर ,आह टमाटर !
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* जब हम छोटे थे तो टमाटर इतने नहीं चलते थे .हर सब्ज़ी का अपना स्वाद होता अपनी सुगंध,अपना रूप अपना रंग कहाँ ,अब तो सब टमाटर होता जा रहा है...
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सोमवार, 4 अक्टूबर 2010
देवनगर की वर्ण-व्यवस्था.
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देवनगर के वासी वर्णो मे पूज्य दो परम- वर्ण - एक ' ॐ' - सृष्टि का आदि स्वर ,दूसरा 'श्री- जो सारे सौन्दर्य एवम् समृद्धि को ध...
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