लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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रविवार, 4 जुलाई 2010
किसी को मत बताना
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* मुझे बाजार में घूमना बडा अच्छा लगता है ।क्या करूँ सार दिन घर में बैठे-बैठे ऊब जाती हूँ ,तो शाम को इच्छा होती है घूमूँ -फिरूँ ,खूब चीजें ...
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बुधवार, 30 जून 2010
किताब और किचेन
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* अपने मन की किताब मिल जाये तो उसे पढ़ने का मज़ा ही कुछ और है ।पर ऐसी किताब आसानी से मिलती कहाँ है जिसमें मन डूब कर रह जाये ।बहुत दिनों बा...
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स्वभाव --
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* मेला देखने के दिन आ गये ! भाव-ताव और क्रय-विक्रय से निवृत्त होकर,यहाँ आ बैठे है विश्राम की मुद्रा मे ।अच्छा लगता है बाज़ार के बीच दर्शक ...
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दर्द की दवा --
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कोई नई खोज करने का परिश्रम किसी खास देश के प्रबुद्धजनों ने भले ही किया हो ,उससे कल्याण सारे मानव- जगत का होता है ।दर्द से छुटकारा दिलाना ब...
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रविवार, 13 जून 2010
चन्दा की गिट्टक
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* चंदा सिलाई कर रही है ।दाहिना हाथ पहिये के हैंडिल को बराबर घुमा रहा है और बायाँ हाथ सुई के नीचे के कपडे को व्यवस्थित करने में लगा है ।उसक...
शनिवार, 27 मार्च 2010
पेनोमीटर.
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लोगों को हमेशा शिकायत बनी रहती है कि हमारा दर्द कोई नहीं जानता ,कभी कोई नहीं सोचता कि हम पर क्या बीत रही है ।दर्द की शिकायतें हर जगह से आती...
पत्नी का पल्ला.
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* बंधु जी बड़े सोच में थे . इधऱ कुछ दिनो से बंधु जी बड़ी उलझन में हैं . किस विषय पर लिखें . . 'क्या टापिक उठाएं समझ में नहीं आ रहा ...
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