लालित्यम्
ललित लेखन -गद्य .
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कहानी-कुञ्ज
भानमती का कुनबा.
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सोमवार, 18 जनवरी 2010
गंगा तीरे !
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देवात्मा हिमालय बार बार पुकारता है आओ ,चले आओ पूरव -पश्चिम दोनो ओर बाहें पसारे कब से खड़ा हूँ ! मेरी छाँह में अंतर में सोई हुई की दिव्यता ज...
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रविवार, 10 जनवरी 2010
शक्ति और अभिव्यक्ति
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नव-रात्र आ गये है ! नवधा शक्ति के धरती की चेतना में अवतरण का काल !अंतःकरण में दैवी भाव के स्फुरण और अनुभवन का काल !आकाश प्रकाशित, दिशायें न...
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बन-सिमिया
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'मम्मी आप काहे की सब्ज़ी लेंगी ?बनसिमिया की भी है,' प्रणति ने पूछा. बनसिमिया -!एकदम नया शब्द !मेरे कान खड़े हो गये ,मन उत्फुल्ल उत...
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एक शृंखला - नर-नारी संबंधों की
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* स्त्री-पुरुष दाम्पत्य के दो चरम रूप हैं -पार्वती और सीता. एक शक्ति है ,प्रज्ञा है, विलक्षण व्यक्तित्व सम्पन्ना! जो अनुचित लगता है, सिर...
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